आज भी तुम वहीं खड़ीं थीं
क्यों
क्यों नहीं बता देती उसको
तुम भी मरती हो
रोज़
रोज़ उसके खौफ से
उतरती सिर्फ नीचे
उतरती हो
आज भी वो आएगा
मलहम लेकर
शायद आज फिर रोंधेगा
उस शरीर को
जिसे झोंक कि तरह वक़्त ने
पी लिया है
क्यों
क्यों नहीं कह देती
बस अब नहीं
अब नहीं मर पाउंगी
रोज़ हज़ारों कीड़ों के सामान
एक साथ
उसके भद्दे हाथ
नहीं सहला पाउंगी
नहीं जी पाउंगी सिर्फ बेटे
के लिए
क्यों
क्यों नहीं आवाज़ उठाती तुम
बस घंटों मेरा सर खाती हो
अपनी ग्लानि यहाँ उड़ेलती हो
बस इसीमे हलकी हो जाती हो
एक कदम उठाती नहीं
और बरसों और दर्द
चुकाना चाहती हो
- शालिनी
क्यों
क्यों नहीं बता देती उसको
तुम भी मरती हो
रोज़
रोज़ उसके खौफ से
उतरती सिर्फ नीचे
उतरती हो
आज भी वो आएगा
मलहम लेकर
शायद आज फिर रोंधेगा
उस शरीर को
जिसे झोंक कि तरह वक़्त ने
पी लिया है
क्यों
क्यों नहीं कह देती
बस अब नहीं
अब नहीं मर पाउंगी
रोज़ हज़ारों कीड़ों के सामान
एक साथ
उसके भद्दे हाथ
नहीं सहला पाउंगी
नहीं जी पाउंगी सिर्फ बेटे
के लिए
क्यों
क्यों नहीं आवाज़ उठाती तुम
बस घंटों मेरा सर खाती हो
अपनी ग्लानि यहाँ उड़ेलती हो
बस इसीमे हलकी हो जाती हो
एक कदम उठाती नहीं
और बरसों और दर्द
चुकाना चाहती हो
- शालिनी