हर बरस जब वसंत कहीं फूटता है
उस लाल पलाश के लिए दिल रोता है
कितना समय बीत गया न
उसे महसूस किये
तुम अपने प्यारे से
नन्हे हाथों से तोड़कर
उपहार दिया करते थे
पलाश का
यहाँ भी
वसंत आया है
लेकिन न तुम हो
और न है पलाश
शालिनी
उस लाल पलाश के लिए दिल रोता है
कितना समय बीत गया न
उसे महसूस किये
तुम अपने प्यारे से
नन्हे हाथों से तोड़कर
उपहार दिया करते थे
पलाश का
यहाँ भी
वसंत आया है
लेकिन न तुम हो
और न है पलाश
शालिनी
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