Wednesday, 4 December 2013

एक महीन सा रिश्ता

अर्णव के स्कूल का रास्ता एक शांत ग्रेवयार्ड से होकर जाता है। बड़ी अजीब सी बात है मगर यहाँ इतनी खूबसूरती फैली हुई है कि कभी भी जेहन में आता ही नहीं कि मैं कहाँ से गुज़र रही हूँ। अक्सर लोग यहाँ सुस्ताने बैठते हैं कुछ किताबें पढ़तें हैं तो कुछ अपने कुत्ते को टहलाते हैं।  तो कुल मिलाकर  यह एक ऐसी जगह है जहाँ ऐसा महसूस ही नहीं होता कि यहाँ किसी को दफनाया गया होगा।  हालाँकि यहाँ लगे बड़े बड़े क्रॉस इसकी गवाही देते हैं। पहले पहल जब मैं ताम्पेरे , फ़िनलैंड आई तब पास कि लम्बी सड़क से होकर जाती।  कई बार मन किया कि छोटा रास्ता पकडूं मगर हिम्मत ही नहीं हुई।  सोचिये ज़रा भारत में हम ऐसी जगहों पर जाने से बचते हैं।  लेकिन इसकी खूबसूरती ने अब इतना बांध लिया है कि जब तक मेरे  पाँव यहाँ नहीं पड़ते तबतक कुछ छूटा सा लगता है। उन बहुत सी कब्रों पर लिखे नामों को रोज़ गौर से देखती हूँ।  अधितकर कब्रें 1800  के आसपास कि हैं। … सोचती हूँ कि उस समय का फ़िनलैंड कैसा रहा होगा।  स्वीडन कि बादशाहत में कैसे दिन रहे होंगे। … बहुत अजीब सा रिश्ता बना लिया है मैंने इनसभी अनजान लोगों से। 

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